Tuesday, June 18, 2019

सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य प्राप्ति हेतु व्रत

वैभव लक्ष्मी व्रत

 यह व्रत बहुत ही सरल सीधा साधा व्रत है| इस व्रत के प्रभाव से सभी प्रकार के कष्ट दूूर होते हैं  तथा व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं|

 विधि: वैभव लक्ष्मी व्रत बहुत सरल व्रत है, फिर भी कुछ नियम है जिनका पालन करना बहुत ही आवश्यक है|
लक्ष्मी व्रत का प्रारंभ पूर्णिमा के शुक्रवार अथवा शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से ही करना चाहिए| सुबह स्नानादि करके लाल वस्त्र धारण करना चाहिए| लाल रंग मा लक्ष्मी जी को अति प्रिय है| किसी की भी चुगली नहीं करनी चाहिए, बुराई से दूर रहना चाहिए| मन में जय मां लक्ष्मी, जय मां लक्ष्मी का जाप करना चाहिए| क्रोध से भी दूर रहना चाहिए| यह व्रत करने वाले एक बार  भोजन करके व्रत पूरा कर सकते हैं यदि शक्ति नहीं है तो दो बार  भी भोजन कर सकते हैं|
 सबसे अच्छी बात है यह है कि यह व्रत आप समयानुसार कर सकते हैं|
 सबसे पहले व्रत लेने से पहले मन्नत मानी जाती है कि मैं 11, 21 या 51 शुक्रवार  तक यह व्रत करूंगी या करूंगा| यह व्रत कोई भी कर सकता है बच्चे बूढ़े कोई भी| जितनी मन्नत मांगते हैं उसके अंतिम शुक्रवार को उद्यापन किया जाता है|
 शाम को घर का बना प्रसाद बनाकर लक्ष्मी जी का भोग लगाया जाता है|
 किसी के घर का भोजन इस व्रत में नहीं किया जाता है|

 पूजा करने की विधि: सबसे पहले लाल कपड़ा लेकर उसे चौकी पर बिछाए और उसे पूर्व दिशा में रखें, तत्पश्चात लक्ष्मी जी को विराजमान करें साथ में गणेश जी भी होना आवश्यक है|
 सर्वप्रथम गणेश जी का कुमकुम से पूजन करें, तत्पश्चात लक्ष्मी जी को कुमकुम की बिंदी लगाकर पूजन करें|
 एक तांबे के लोटे में जल भर कर उसी चौकी पर दाहिनी तरफ मुट्ठी भर चावल रख कर उस पर लोटा रखें, उस के ऊपर एक कटोरी रखें| कटोरी में एक सोने का गहना रखें, सोने का ना हो तो रुपया या चांदी का गहना रख सकते हैं|
 तत्पश्चात उनको भी कुमकुम की बिंदी लगाए, कलश पर स्वास्तिक का चिन्ह  बनाएं|
 लाल रंग का फूल चढ़ाएं  तत्पश्चात धूपबत्ती व  देसी घी का दीपक जलाएं|
 कुमकुम यहां रोली के लिए कहा गया है, रोली का तिलक लगाने के बाद हल्दी से भी तिलक करें| हाथ में अक्षत { चावल} ले, अक्षत खंडित[ टूटे हुए] नहीं होने चाहिए| इसके बाद कथा पढ़े |






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                               श्री राधे  



जय माता की
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