श्रीमद भगवत गीता के दसवें अध्याय से सभी पापों से मुक्ति मिलती है|
भगवान श्री हरि विष्णु हमेशा उसके साथ रहते हैं, शंख चक्र धारी भगवान विष्णु का सदैव ही उन्हें दर्शन रहता है तथा पूर्व जन्म में किए हुए समस्त पाप चाहे वह शराबी ही हो या ब्रह्म हत्यारा ही क्यों न हो समस्त पापों से मुक्त हो जाता है|
भगवत गीता के श्रवण मात्र से नर या नारी कोई भी हो उसे समस्त आश्रमों के पालन का फल प्राप्त होता है|
भगवान श्री हरि विष्णु हमेशा उसके साथ रहते हैं, शंख चक्र धारी भगवान विष्णु का सदैव ही उन्हें दर्शन रहता है तथा पूर्व जन्म में किए हुए समस्त पाप चाहे वह शराबी ही हो या ब्रह्म हत्यारा ही क्यों न हो समस्त पापों से मुक्त हो जाता है|
भगवत गीता के श्रवण मात्र से नर या नारी कोई भी हो उसे समस्त आश्रमों के पालन का फल प्राप्त होता है|
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