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Tuesday, June 25, 2019

Cautions for chanting mantra






There are some rules which you will have to follow properly before starting this mantra.


First thing you have to keep yourself neat and clean, before doing that mantra take bath.

Second thing use kamalgatta rosary for chanting the mantra.

Third thing use cow ghee for litting the diya.

Fourth thing wear red clothes.

Fifth-offer red flower as this colour is HER favourite.

Six-keep shree yantra in front of you.

Seventh -your face should be in east.

Eight-offer kheer as bhog in puja.

Nine-Dont forget to do Aarti.

This is really a powerful mantra so don't 
doubt on it's working power.


I hope you will surely like this post.



  Shree Radhe



श्री मद्भगवद गीता हिंदी सारांश

                   
                      ॐ श्री परमात्मने नमः

                            दसवाँ अध्याय

भगवान श्री कृष्ण जी बोले, हे महाबाहो !फिर भी मेरे परम् रहस्य और प्रभाव युक्त वचन श्रवण कर जो कि मैं तुझ अतिशय प्रेम रखने वाले के लिए हित की इच्छा से कहूंगा |
1-हे अर्जुन !मेरी उत्पत्ति को अर्थात विभूति सहित लीला से प्रकट होने को न देवता लोग जानते हैं और न महर्षिजन ही जानते हैं, क्यूँकि मैं सब प्रकार से देवताओं का और महिर्षियों का भी आदिकरण हूँ |2-जो मेरे को अजन्मा अर्थात वास्तव में जन्मरहित और अनादि तथा लोकों का महान ईश्वर तत्व से जा नता है, वह मनुष्यों में ज्ञानवान पुरुष सम्पूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है |3-हे अर्जुन !निश्चय करने की शक्ति एवं अमूढ़ता, क्षमा, सत्य तथा इन्द्रियों का वश में करना और मन का निग्रह तथा सुख, दुःख, उत्पत्ति और प्रलय एवं भय और अभय भी |4-तथा अहिंसा, समता, संतोष, तप, दान, कीर्ति और अपकीर्ति ऐसे यह प्राणियों के नाना प्रकार के भाव मेरे से ही होते हैं |5-हे अर्जुन !सात तो महर्षिजन और चार उनसे भी पूर्व में होने वाले सनकादि तथा स्वयम्भुव आदि चौदह मनु, यह मेरे में भाववाले सब के सब मेरे संकल्प से उत्पन्न हुए हैं कि जिनकी संसार में यह सम्पूर्ण प्रजा है |6-जो पुरुष इस मेरी परमैष्वर्यरूप विभूति को और योगशक्ति को तत्व से जानता है |वह पुरुष निश्चल ध्यानयोगद्वारा मेरे में ही एकीभावसे स्थित होता है, इसमें कुछ भी संशय नहीं है |


Sunday, June 23, 2019

10 chapter of Bhagvat Geeta दसवां अध्याय श्रीमद भगवत गीता

भगवान् शिव कहते हैं- सुंदरी! अब तुम दशम अध्याय की महात्मय की परम पावन कथा सुनो, जो स्वर्ग रूपी दुर्ग में जाने के लिए सुंदर सोपान और प्रभाव की चरम सीमा है| काशीपुरी में धीर बुद्धि नाम से विख्यात एक ब्राह्मण था, जो मुझमें प्रिय नंदी के समान भक्ति रखता था| वह पावन कीर्ति के अर्जन में तत्पर रहने वाला, शांत चित्त और हिंसा, कठोरता एवं दुस्साहस से दूर रहने वाला था| जितेंद्रीय होने के कारण वह निर्मिती मार्ग में ही स्थित रहता था| उसने भेज रूपी समुद्र का पार पा लिया था| वह संपूर्ण शास्त्रों के तात्पर्य का ज्ञाता था| उसका चित्र सदा मेरे ध्यान में संलग्न रहता था| वह मन को अंतरात्मा में लगाकर सदा आत्म तत्व का साक्षात्कार किया करता था, अतः जब मैं चलने लगता, तब मैं प्रेम बस उसके पीछे दौड़ दौड़ कर उसे हाथ का सहारा देता रहता था|
यह देखकर मेरे पार्षद  ने पूछा- भगवन! इस प्रकार का भला, किसने आपका दर्शन किया होगा| इस महात्मा ने कौन सा तक होम अथवा जब किया है कि स्वयं आप ही पद पद पर इसे हाथ का सहारा देते चलते हैं?
 
   भृंगिरिटी पार्षद  का यह प्रश्न सुनकर मैंने इस प्रकार उत्तर देना आरंभ किया| एक समय की बात है, कैलाश पर्वत के पश्चिम भाग में पुन्नाग वन के भीतर चंद्रमा की अमृत मई किरणों से धुली हुई भूमि में एक बेदी का आश्रय लेकर मैं बैठा हुआ था| मेरे बैठने के क्षण भर बाद ही सही सा बड़े जोर की आंधी उठी, वहां के वृक्षों की शाखाएं नीचे ऊपर होकर आपस में टकराने लगी, कितनी ही टहनियां टूट टूट कर बिखर गई| पर्वत की अविचल छाया भी हिलने लगी| इसके बाद वहां महान भयंकर शब्द हुआ, जिससे पर्वत की कंदराएं प्रति ध्वनित हो उठीं | तदनंतर आकाश से कोई विशाल पक्षी उतरा, जिसकी कांति काले मेघ के समान थी| वह काजल की राशि, अंधकार के समूह अथवा पंख कटे हुए काले पर्वत सा जान पड़ता था| पैरों से पृथ्वी का सहारा लेकर उस पक्षी ने मुझे प्रणाम किया और एक सुंदर नवीन कमल मेरे चरणों में रखकर स्पष्ट वाणी में स्तुति करनी आरंभ की|
पक्षी बोला- देव आपकी जय हो| आप चिदानंद मई सुधा के सागर तथा जगत के पालक हैं| सदा सद्भावना से युक्त एवं अनासक्ति की लहरों से उल्लासित है| आपकी वैभव का कहीं अंत नहीं है| आपकी जय हो|
अद्वैत भावना से परिपूर्ण बुद्धि के द्वारा आप त्रिविध वालों से रहित है| आप जितेंद्रीय भक्तों के अधीन रहते हैं तथा ध्यान में आपके स्वरूप का साक्षात्कार होता है| आप अविद्या में उपाधि से रहित, नित्य मुक्त, निराकार, निरामय, असीम,  अहंकार शून्य , आवरण रहित और निर्गुण है| आपके चरण कमल शरणागत भक्तों की रक्षा करने में प्रवीण है| अपनी बहन कलाकृति महा सर्प की विश्व वाला से आप ने कामदेव को भस्म किया है| आपकी जय हो| आप प्रत्यक्ष आदि  प्रमाणों से दूर होते हुए भी प्रमाण स्वरूप हैं| आपको बार-बार नमस्कार है| चैतन्य के स्वामी तथा त्रिभुवन रूप धारी आपको प्रणाम है| मैं श्रेष्ठ योगियों द्वारा तुम बिन आपके उन चरण कमलों की वंदना करता हूं, जो अपार भग्गू पाप के समुद्र से पार उतारने में अद्भुत शक्तिशाली हैं| महादेव! साक्षात बृहस्पति भी आपकी स्तुति करने की धृष्टता नहीं कर सकते| सहस्त्र मुखो वाले नागराज शेष में भी इतनी जरूरी नहीं है कि मैं आपके गुणों का वर्णन कर सकें | फिर मेरे जैसे छोटी बुद्धि वाले पक्षी की तो बिसात ही क्या है?
  उस पक्षी के द्वारा किए हुए इस स्तोत्र को सुनकर मैंने उससे पूछा- विहंगम! तुम कौन हो और कहां से आए हो? तुम्हारी आकृति तो हंस जैसी है, मगर रंग कोेए का मिला है| तुम जिस प्रयोजन को लेकर यहां आए हो,  उसे बताओ?
पक्षी बोला- देवेश !मुझे ब्रह्मा जी का हंस जानिए| धूर्जटे ! जिस कर्मों से मेरे शरीर में इस समय कालीमा आ गई है, उसे सुनिए| प्रभु! यद्यपि आप सर्वज्ञ हैं[ अतः आपसे कोई बात छिपी नहीं है] तथापि यदि आप पूछते हैं तो बतलाता हूं| सूरत नगर के पास एक सुंदर सरोवर है, जिसमें कमल लह लह आते रहते हैं| उसी में से बाल चंद्रमा के टुकड़े जैसे श्वेत मृणालो के ग्रास लेकर में बड़ी तीव्र गति से आकाश में उड़ रहा था| उड़ते उड़ते सहसा वहां से पृथ्वी पर गिर पड़ा| जब होश में आया और अपनी गिरने का कोई कारण ना देख सका तो मन ही मन सोचने लगा-' अ हो! यह मुझ पर क्या आ पड़ा? आज मेरा पतन कैसे हो गया? ' पके हुए कपूर के समान मेरे श्वेत शरीर में यह कालीमा कैसे आ गई? विस्मित होकर इस प्रकार में भी विचार ही कर रहा था कि उसको खरे की कमरों में से एक ऐसी वाणी सुनाई दी---" हंस उठो! मैं तुम्हारी गिरने और काली होने का कारण बताती हूं"| तब मैं उठकर सरोवर के बीच में गया और वहां पांच कमरों से युक्त एक सुंदर कमलीनी को देखा| उसको प्रणाम करके मैंने प्रदक्षिणा की अपने पतन का सारा कारण पूछा|
कमलिनी बोली - कलहंस! तुम आकाश मार्ग से मुझे लांघ  कर गए हो, उसी पाठक के परिणाम स्वरूप तुम्हें पृथ्वी पर गिर ना पड़े तथा उसी के कारण तुम्हारे शरीर में कालीमा दिखाई देती है| तुम्हें गिरा देख मेरे हृदय में दया भर आई और जब मैं इस मध्यम कमल के द्वारा बोलने लगी हूं,  उस समय मेरे मुख से निकली हुई सुगंध को सुनकर 60000 भंवरे स्वर्ग लोक को प्राप्त हो गए हैं| पक्षीराज !जिस कारण मुझ में इतना वैभव प्रभाव आया है, उसका कारण बताती हूं, सुनो| इस जन्म से पहले तीसरे जन्म में मैं इस पृथ्वी पर एक ब्राह्मण की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थी| उस समय मेरा नाम सरोज बदना था| मैं गुरुजनों की सेवा करती हुई सदा एकमात्र पति व्रत के पालन में तत्पर रहती थी 1 दिन की बात है मैं एक मै ना को पढ़ा रही थी| इससे पति सेवा में कुछ विलंब हो गया| इससे पतिदेव का कुपित हो गए और उन्होंने श्राप दिया-' पापिनी !तू मैना हो जा मरने के बाद यद्यपि मैं मैना ही हुई, तथापि पतिव्रत के प्रसाद से मुनियों के ही घर में मुझे आश्रय मिला| किसी मुनि कन्या ने मेरा पालन-पोषण किया मैं जिसके घर में थी वह ब्राह्मण प्रतिदिन प्रातः काल विभूति योग नाम से प्रसिद्ध गीता के 10वें  अध्याय का पाठ करते थे, और मैं  पाप हारी उस अध्याय को सुना करती थी| विहंगम !का ल  आ जाने पर मैं मैना का शरीर छोड़कर दशम अध्याय के महात्मय  से स्वर्ग लोक में अप्सरा हुई | मेरा नाम पद्मावती हुआ और मैं पदमा की प्यारी सखी हो गई| एक दिन मैं विमान से आकाश में विचार कर रही थी| उस समय सुंदर कमलों से सुशोभित इस रमणीय सरोवर पर मेरी दृष्टि पड़ी और इसमें उतरकर जैसे ही मैंने जल क्रीड़ा आरंभ की, वैसे ही दुर्वासा मुनि आ धमके | उन्होंने वस्त्र हीन अवस्था में मुझे देख लिया| उनके वैसे मैंने स्वयं ही एक कमलि नी का रूप धारण कर लिया| मेरे दोनों पैर दो कमल हुए| दोनों हाथ भी दो कमल हो गए| और शेष अंगों के साथ मेरा मुख भी एक कमल हुआ|
इस प्रकार में 5 कम लो से युक्त हुई| मुनिवर दुर्वासा ने मुझे देखा| उनके नेत्र क्रोध अग्नि से जल रहे थे|
वे बोले-' पापिनी! तू इसी रूप में 100 वर्षों तक पढ़ी रहे|' यह श्राप दे कर दे क्षण भर में अंतर्ध्यान हो गए| कमलिनी होने पर भी विभूति योग अध्याय के महात्मय  से मेरी वाणी लुप्त नहीं हुई है| मुझे लांघने  मात्र  अपराध से तुम पृथ्वी पर गिरे हो| पक्षीराज! यहां खड़े हुए तुम्हारे सामने ही आज मेरे श्राप की निर्मिति हो रही है, क्योंकि आज 100 वर्ष पूरे हो गए| मेरे द्वारा गाए जाते हुए उस उत्तम अध्याय को तुम भी सुन लो| उसके श्रवण मात्र से तुम भी आज ही मुक्त हो जाओगे|
    
यूं कह कर पत्नी ने स्पष्ट एवं सुंदर वाणी में दसवें अध्याय का पाठ किया और वह मुक्त हो गई| उसे सुनने के बाद उसी के दिए हुए इस उत्तम कमल को लाकर मैंने आपको अर्पण किया है|
       इतनी कथा सुनाकर उस पक्षी ने अपना शरीर त्याग दिया| यह एक अद्भुत सी घटना हुई| वही पक्षी अब दसवें अध्याय के प्रभाव से ब्राह्मण कुल में उत्पन्न हुआ है| जन्म से ही अभ्यास होने के कारण शैशवावस्था से ही इस के मुख से सदा गीता के 10 वें अध्याय का उच्चारण हुआ करता है| 10 वीं अध्याय के अर्थ चिंतन का यह परिणाम हुआ है कि यह सब भूतों में स्थित शंख चक्र धारी भगवान विष्णु का सदा ही दर्शन करता रहता है| इसकी स्नेह पूर्ण दृष्टि जब कभी किसी देहधारी  के शरीर पर पड़ जाती है, तब वह चाहे शराबी और भ्रम में हत्यारा ही क्यों ना हो,  मुक्त हो जाता है| तथा पूर्व जन्म में अभ्यास किए हुए 10 वें  अध्याय के महात्मय से उसको दुर्लभ तत्व ज्ञान प्राप्त है तथा इसने जीवन मुक्ति भी पाली है| पता जब यह रास्ता चलने लगता है तो मैं इसे हाथ का सहारा दिए रहता हूं| यह सब दसवें अध्याय की ही महिमा है|
पर्वती !इस प्रकार मैंने भृंगिरिटी के सामने जो पाप नाशक कथा कही थी, वहीं यहां तुमसे भी कही है,  नर हो या नारी अथवा कोई भी क्यों ना हो इस दसवें  अध्याय के श्रवण मात्र से उसे सब आश्रमों के पालन का फल प्राप्त होता है |










बोलो श्री राधे
        

Importance of reading 10th chapter of Bhagvat.श्रीमद भगवत गीता के दसवें अध्याय का महत्व

श्रीमद भगवत गीता के दसवें अध्याय से सभी पापों से मुक्ति मिलती है|
भगवान श्री हरि विष्णु हमेशा उसके साथ रहते हैं, शंख चक्र धारी भगवान विष्णु का सदैव ही उन्हें दर्शन रहता है तथा पूर्व जन्म में किए हुए समस्त पाप चाहे वह शराबी ही हो या ब्रह्म हत्यारा ही क्यों न हो समस्त पापों से मुक्त हो जाता है|
भगवत गीता के श्रवण मात्र से नर या नारी कोई भी हो उसे समस्त आश्रमों के पालन का फल प्राप्त होता है|




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श्री  राधे 

Saturday, June 22, 2019

If colleague are planning something.यदि सहयोगी कर्मी साजिश रच रहें हैं तो...

यदि आपके सहयोगी भी आपको परेशान कर रहें हैं, बिना बात के आपके खिलाफ रहते हैं, आपको परेशान देखकर ही उन्हें ख़ुशी होती हैं, तो निम्न उपाय लाभकारी हो सकते हैं |



उपाय :

शुक्ल पक्ष के बुधवार को मुंग की दाल के लड्डूओं का गणेश जी को भोग लगाएं |





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                         श्री राधे



Thursday, June 20, 2019

क्या बॉस बहुत ज्यादा गुस्सा करते हैं?


क्या बॉस आपको बिलकुल पसंद नहीं करते हैं?
जी हाँ,
आजकल ये समस्या आम बात हो गई है |समझ ही  नहीं आता ऐसा क्या करें कि बॉस हमेशा पक्ष मे रहें |
इसके लिये ज्योतिष मे उपाय है, आप भी ये उपाय अपनाकर बॉस को अपने अनुकूल बना सकते हैं |


उपाय :

प्रतिदिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और सूर्य को जल दें, ताँबे का कलश प्रयोग में लायें तथा निम्न मंत्र पढ़ें..

ॐ ब्रह्म स्वरूपे सूर्य नारायणे नमः 


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                         श्री राधे





परीक्षा से पहले की घबराहट दूर करने के उपाय



यदि किसी परीक्षा से पहले आपको बहुत घबराहट होती है तो इसका  मतलब यह है कि आपका सूर्य कमजोर है |
निम्न उपाय करें आपको लाभ अवश्य ही होगा |

उपाय :

परीक्षा देने जाते समय मीठे दही में तुलसी डालकर खाना चाहिए |तुलसी को चबाना नहीं है,  सीधे निगलना है|
पास में कपूर रखकर लें जाएं |


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क्या आपके सहयोगी साजिश रच रहे हैं?


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                     श्री राधे





कर्ज से मुक्ति के लिये



आजकल लोगों को अपना लाइफस्टाइल अच्छा करने का जूनून सा सवार है, इस कारण लोग कर्ज लेने में भी नहीं झिझकते |ऊपर से finance companies और banks ने लोन लेना थोड़ा सरल भी कर दिया है इसलिए अब EMI पर भी लोग वस्तुएँ लेने लगे हैं |

पहले लोन लेना या क़र्ज़ लेना बहुत बुरा माना जाता था पर अब लोगों में धैर्य की कमी के कारण और दिखावे का चलन
होने के कारण क़र्ज़ लेना आम हो गया है |

जब कर्ज द्वारा कोई वस्तु जैसे कोई वाहन लिया जाता है या मकान के लिये क़र्ज़ लिया जाता है, ये क़र्ज़ बड़े माने जाते हैं|पूरी जिंदगी लोन की  EMI में ही कट जाती है फिर उस वस्तु की महत्वता कम लगने लगती है, और हमेशा चिंता सताती है कि ऋण मुक्ति कैसे हो और उस पर भी यदि बीच में कोई दुर्घटना हो जाये तब तो मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है |निराशा का अनुभव होने लगता है |
ये सब ग्रह दशाएं होती हैं, सब ईश्वर की इच्छा से होता है |यदि आप क़र्ज़ से मुक्ति  चाहते हैं तो कुछ ऐसे उपाय हैं जिन्हे यदि पूर्ण श्रद्धा से किया जाये तो आय के नए स्रोत बनना शुरू हो जाते हैं और क़र्ज़ का बोझ कम लगने
 लगता है  |


उपाय :


  • मंगलवार को प्रातः उठ कर लगभग 250ग्राम मसूर की  डाल लेकर उसे शिवलिंग पर निम्न मंत्र का 11 बार जाप करते हुए चढ़ाएं.. मंत्र :ॐ ऋणमुक्तेश्वर महादेवाय ||
  • भगवत गीता के ग्यारहवें अध्याय का नित्य पाठ करें |
  • हर शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर श्री हरी विष्णु जी व श्री यन्त्र का अभिषेक करें |
  • वैसे तो लक्ष्मी जी का पूजन रोज़ाना करें लेकिन शुक्रवार वाले दिन विशेष रूप से पूजा करें |
  • शुक्रवार को श्री यन्त्र का कच्चे दूध से अभिषेक करें |
  • इंद्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें |
  • कनक धारा स्तोत्र का भी पाठ करें |
  • सफ़ेद आक की जड़ को सफ़ेद कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें |

ईश्वर कृपा से आपको अवश्य लाभ होगा |

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                               श्री राधे  


वैवाहिक कड़वाहट दूर करने के लिये उपाय

 
यदि आपके जीवन में उथल पुथल मची हुई है,  तो
एक बहुत साधारण सा  उपाय  करें |


उपाय :
पूजा करते समय हमेशा गले में सोने का मंगलसूत्र पहनें |मांग में पूजा के समय सूखा सिंदूर जरूर लगाएं |

 





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                               श्री राधे  

Wednesday, June 19, 2019

बॉस को खुश करने के लिए उपाय


 कभी-कभी ऐसा होता है कि हम अपने ऑफिस में कितनी भी मेहनत से कार्य कर लें, लेकिन बॉस का पारा हमेशा चढ़ा रहता है| ऊपर से कुछ सहयोगी आग में घी का कार्य करते हैं, इन सभी समस्याओं से बचने के लिए यह अचूक उपाय अपना सकते हैं|


 उपाय

 केसर का तिलक लगाकर ऑफिस जाए, गुरुवार के दिन केले के पेड़ के पास देसी घी का दीपक जलाएं|
 निम्न उपाय से आपके बॉ स आपके अनुकूल रहने लगेंगे| यह उपाय पांच गुरुवार अवश्य करें|

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                               श्री राधे  









                   




For stability of Goddess Laxmi


आप मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन लक्ष्मी घर में स्थिर नहीं रह पातीं| पैसा घर में बहुत आता है,  किंतु अनावश्यक खर्चे में निकल जाता है| लक्ष्मी को घर में स्थिर करने के लिए निम्न उपाय बताए जा रहे हैं, इन उपायों को प्रयोग करके आप भी लाभ उठा सकते हैं|
उपाय :
प्रतिदिन शिव आराधना अवश्य करें, शिव तांडव स्तोत्र का घर में पाठ करें| घर में लक्ष्मी स्थिर रहेंगी|

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                         श्री राधे




               

             

Dream




हम प्रतिदिन कोई ना कोई  सपना देखते ही हैं, कुछ स्वप्न ऐसे होते हैं जिनका हमारे निकटतम भविष्य से कुछ ना कुछ सम्बन्ध अवश्य होता है |
प्रकृति हमें स्वप्न के रूप में निकटतम भविष्य का संदेश देती है, यह स्वप्न अच्छे भी होते हैं और खराब भी होते हैं|
यहां दोनों प्रकार के स्वप्नों के फल का वर्णन किया जा रहा है,  ध्यानपूर्वक पढ़ें:
शुभ स्वप्न

  • यदि स्वप्न में फलों से लदा वृक्ष देखते हैं, तो
आगामी दिनों में आपको कोई खुशखबरी या धन से संबंधित लाभ होने वाला है|

  • स्वप्न में मल देखना भी धन प्राप्त होने का सूचक है|
  • स्वप्न में देवी देवता को देखना सौभाग्य की वृद्धि करता है|
  • स्वप्न में सफेद वस्तु या जानवर देखना राज्य की ओर इंगित करता है|
  • स्वप्न में सफेद पक्षी देखने से आगामी दिनों में नौकरी में प्रमोशन मिलता है|
  • स्वप्न में उड़ना या सीडी चढ़ना  सफलता की ओर बढ़ाता है|
  • किसी की मृत्यु देखना उसकी लंबी उम्र होने का संकेत है|
  • स्वप्न में बाल गोपाल देखना, किसी प्रियजन के घर पर शिशु का जन्म होने वाला है|
  • बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद देना, बहुत ही लाभकारी है|

अशुभ  स्वप्न
  • घर में किसी का विवाह देखना|
  • सिक्कों का देखना|
  • घर में आग का लगना देखना|
  • सीडी से चढ़ते हुए गिर जाना|
  • पानी में डूबना|
  • भयंकर तूफान देखना|
  • काले पशु देखना|
  • किसी मृत व्यक्ति का कुछ मांगना|

निम्न स्वप्न अशुभ फलदायी होते हैं|

अशुभ स्वप्न देखने पर क्या उपाय करें?

सर्वप्रथम एक गिलास ठंडा पानी पिए, तत्पश्चात 11 बार अच्युत- अच्युत बोलें |
दोबारा सोने का प्रयास करें, जब दोबारा उठें  यह स्वप्न शौचालय में भी बोलें |
अशुभ स्वप्न का प्रभाव समाप्त हो जाएगा|

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                               श्री राधे  








                 


Is there poverty in your Kundali?


 कभी-कभी ऐसा होता है कि हम बहुत ज्यादा मेहनत करते हैं फिर भी हमें उसका आशातीत फल नहीं मिलता| क्या आपने कभी सोचा है? ऐसा क्यों होता है?  चलिए, आज हम आपको इस बात से अवगत कराते हैं| यदि आपकी कुंडली में दारिद्र्य योग है, तो आपको बहुत संघर्ष के बाद ही धन की प्राप्ति होती है| आप जिस भी कार्य को पूरा करने की  सोचते हैैं  वह कार्य पूरा हो ही नहीं पाता है|

 दरिद्र योग के लक्षण


  •  आपका कार्य समय पर नहीं हो पाता|
  •  आप नये  वस्त्र  खरीदते हैं,  वह कुछ दिनों बाद ही फट जाते हैं|
  •  आप मेहनत बहुत करते हैं,  लेकिन आपको उतना फल नहीं मिलता जबकि कुछ लोग बिल्कुल भी मेहनत नहीं करते हैं और उन्हें उसका ज्यादा फल मिलता है|
  •  मेहनत आप करते हैं लेकिन नाम किसी और का होता है|
  •  आप प्रसिद्धि नहीं पाते हैं|
  •  लोग आपको नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं|
  •  आई हुई लक्ष्मी वापस चली जाती है अर्थात धन हाथ में नहीं रुकता है|
  •  अनावश्यक खर्च होते हैं, कभी बीमारी में या किसी अन्य कार्य में|
  •  आपका घर कभी भी साफ सुथरा नहीं रह पाता है|
  •  घर में लड़ाई झगड़े की स्थिति रहती है|
  •  उदासी और निराशा की भावना हमेशा घर में रहती है|


 अब कुंडली में लिखा हुआ तो हम नहीं बदल सकते हैं, किंतु उसे अपने अनुकूल कर सकते हैं| दरिद्र योग को कम करने अर्थात उसके प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय यहां बताए जा रहे हैं, उन्हें अवश्य पढ़ें|

 उपाय


  •  अपनी जीवनशैली में बदलाव करें, प्रातः सूर्योदय से पहले उठने का प्रयास करें, नहा धोकर सूर्य को अर्घ्य दें| यदि ऐसा संभव ना हो तो आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें|
  •  अपने घर को व्यवस्थित रखें, घर को व्यवस्थित रखने से दारिद्र्य योग का प्रभाव कम होता है|
  •  सुबह उठकर मुख्य दरवाजे पर, एक लोटा जल अवश्य डालें |
  •  बिना झाड़ू लगे भोजन या अन्य कार्य ना करें| सर्वप्रथम पूरे घर को साफ करें, यहां साफ करने से तात्पर्य झाड़ू लगाने से है, बाकी सफाई से नहीं है| मुख्यत : महिलाएं यह सोचती  हैं,  पहले अपने घर को पूरी तरह से साफ कर ले फिर हम नहा धोकर पूजा पाठ करेंगे ऐसा ना करें, पूजा-पाठ 10 बजे से पहले ही करें|
  •  फटे या उधड़े वस्त्र पहनकर पूजा ना करें|
  •  महिलाएं मुख्य श्रृंगार के बाद ही पूजा करें|
  •  शुक्रवार को खीर का प्रसाद जरूर बनाएं, चीनी के स्थान पर मिश्री का प्रयोग करें और लक्ष्मी जी को भोग लगायें |
  •  प्रतिदिन पंच देव (गणेशजी, लक्ष्मी जी, विष्णुजी, शंकरजी, हनुमानजी )की पूजा अवश्य करें| यहां पूजा से तात्पर्य अपने मंदिर में पंचदेव को स्थान अवश्य दें तथा आरती करते समय सब की आरती अवश्य करें|
  •  पहली रोटी गाय की जरूर निकालें|
  •  महिलाएं शुक्रवार के दिन श्रृंगार करके घर में घूमें |
  •  घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक के चिन्ह बनाएं|


 यदि आप यह छोटे-छोटे उपायों को अपनाते हैं, तो आपके कुंडली के दरिद्र योग का प्रभाव कम हो जाएगा|


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                               श्री राधे  






                       


Mantra for success of child


यदि आपके बच्चे की आपको हमेशा चिंता रहती है, या आपको लगता है कि आपका बच्चा मेहनत तो कर रहा है किंतु उसे सफलता नहीं मिल रही है |तो इस चिंता के समाधान के लिये आप  निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं |

उपाय :
 किसी शुक्ल पक्ष के बुधवार को  गणेश जी को चावल व सुपारी चढ़ाएं, बाद में चावल जरूरतमंद को दे दें, और सुपारी पूजा के स्थान में रख लें, सुपारी पर कलावा भी अवश्य बांधे |
 गणेश जी की आराधना करें, बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं|


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                             श्री राधे                                            

Tuesday, June 18, 2019

Mantra for Success in Interview




आजकल नौकरी ढूढ़ना उतना ही मुश्किल है,  जैसे ज़मीन पर गिरी हुई सुई ढूढ़ना......


प्रतिस्पर्धा का दौर इतना ज्यादा है कि व्यक्ति एक के बाद दूसरी नौकरी की तलाश में रहता है और केवल भटकता रहता है, अच्छी डिग्री होने के वावजूद भी व्यक्ति इधर उधर भटकता रहता है, ऐसे में यदि साक्षात्कार में सफलता ना मिले तो व्यक्ति को अपनी प्रतिभा पर ही संदेह होने लगता
 है |


यह सब ग्रहों का खेल होता है, कुछ लोगों को बिल्कुल मेहनत नहीं करनी पडती और अपने आप सब मिल जाता है |लेकिन कुछ को कड़ी मेहनत के बाद भी कुछ नहीं मिलता लेकिन ग्रहों की चाल को सामान्य करने के कुछ उपाय आप कर सकते हैं |



उपाय :

साक्षात्कार में जाने से पहले एक कागज पे अपनी सफलता के बारे में लिखकर लडडू गोपाल जी के पास रख जाएं, यह कार्य बिना रोक टोक के होना चाहिए |जब इंटरव्यू में जाये मन में श्री राधे का स्मरण करें तभी उत्तर दें, सफलता में कोई संदेह नहीं रहेगा |

बाद  नौकरी लगने पर पत्र को बहते जल में प्रवाहित करें |



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                             श्री राधे                                            




                             


                                  

Problems in job (नौकरी में परेशानी )



                       जय माता की                                       
आजकल सबसे ज्यादा लोग नौकरी की वजह से परेशान रहते हैं |सबसे पहले नौकरी ढूंढ़ने की परेशानी, जब नौकरी मिल जाये तब नौकरी को चलाने की समस्या |कभी सहयोगी के साथ अनबन, कभी बॉस की फटकार  |ये सब ग्रहों का खेल होता है, कुछ आपकी कुंडली का भी दोष होता है,  किंतु ज्योतिष में इसका उपाय है |

उपाय:
हनुमान जी की पंचमुखी चित्र अथवा मूर्ति के आगे देशी घी का दीपक जलाकर रखें, तत्पश्चात  दो लौंग ले उसे मुट्ठी में रख लें, तथा बजरंग वाण का 11बार पाठ करें और पाठ के पश्चात् लौंगो को कपूर जलाकर चढ़ा दें |
हनुमान जी की आरती करें और अपनी नौकरी से सम्बंधित परेशानी उनसे कहें |

ध्यान रखने योग्य बातें :
मंगलवार से पूजा का आरम्भ करें
ये पाठ ज्यादा से ज्यादा 11दिन में फल अवश्य देता है अतः संदेह ना करें |
यदि संदेह है तो पाठ ना करें |
पाठ करते समय एकाग्रता होना जरुरी है |
पाठ अवधि के दौरन किसी को  अपनी उपासना की जानकारी ना दें |
किसी ऐसे व्यक्ति से इसकी चर्चा ना करें जो ईश्वर में आस्था नहीं रखता हो |



यह वास्तविक अनुभव के बाद बताया गया उपाय है |इसका लाभ उस व्यक्ति को तीन दिनों में हुआ था |आप भी लाभ उठाएं और औरों को इस उपाय की जानकारी दें तथा लाभ होने पर हमें अवश्य बताएं |





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                             श्री राधे                                            





                             

Enemy

हनुमान जी की केवल एक ऐसे ईश्वर है जो अभी भी कलयुग में मौजूद है, वे अपने भक्तों की हमेशा सहायता करते हैं| शत्रु से छुटकारा पाने के लिए बजरंग बाण का वाचन बहुत ही हितकारी है|

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                               श्री राधे  

Gaytri Mantra

गायत्री मंत्र
नित्य सुबह उठकर 108 बार गायत्री मंत्र के जाप से सभी कार्यों की पूर्ति होती है|
 गायत्री मंत्र के प्रभाव से सूर्य मजबूत होता है|

 ओम भूर्भुवः स्वाहा
 तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि
 धियो यो न प्रचोदयात्||







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                               श्री राधे  








         

Ganesh Mantra

  गणेश जी मंत्र

 सभी परेशानियों एवं विघ्न बाधाओं को दूर करने के लिए गणेश जी का यह मंत्र बहुत-बहुत लाभकारी है|
 पूर्ण श्रद्धा भक्ति से यदि यह मंत्र 108 बार प्रतिदिन किया जाए तो भगवान गणेश जी अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं|
 मंत्र इस प्रकार है:
 ओम गं गणपतए नमः||


अन्य मंत्र 

माँ गायत्री 







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                               श्री राधे  



जय माता की
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लक्ष्मी जी की आरती


 लक्ष्मी जी की आरती

 ओम जय लक्ष्मी माता|
 मैया जय लक्ष्मी माता||
 तुमको निशदिन सेवक|
मैया जी को निशिदिन सेवक|
 हर विष्णु विधाता|
 ओम जय लक्ष्मी माता||
 उमा, रमा, ब्रह्माणी तुम ही जग माता|
मैया तुम ही जग माता |
 सूर्य चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता
ओम जय लक्ष्मी माता||
 तुम पाताल निवासिनी तुम ही शुभ दाता|
 मैया तुम ही शुभ दाता|
 कर्म,  प्रभाव,  प्रकाशिनी भव निधि की त्राता|
 ओम जय लक्ष्मी माता||
 जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता|
मैया सब सद्गुण आता|
 सब संभव हो जाता मन नहीं घबराता|
 ओम जय लक्ष्मी माता||
 तुम बिन यज्ञ न होते|
वस्त्र न कोई पाता|
मैया वस्त्र न कोई पाता|
 खान-पान का वैभव सब तुमसे आता|
ओम जय लक्ष्मी माता||
 शुभ गुण मंदिर सुंदर क्षीरो दधि जाता|
 मैया क्षीरो दधि जाता|
 रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पाता|
 ओम जय लक्ष्मी माता||
 महा लक्ष्मी जी की आरती जो कोई जन गाता|
मैया प्रेम सहित गाता|
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता|
 ओम जय लक्ष्मी माता||








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                               श्री राधे  



जय माता की
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सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य प्राप्ति हेतु व्रत

वैभव लक्ष्मी व्रत

 यह व्रत बहुत ही सरल सीधा साधा व्रत है| इस व्रत के प्रभाव से सभी प्रकार के कष्ट दूूर होते हैं  तथा व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं|

 विधि: वैभव लक्ष्मी व्रत बहुत सरल व्रत है, फिर भी कुछ नियम है जिनका पालन करना बहुत ही आवश्यक है|
लक्ष्मी व्रत का प्रारंभ पूर्णिमा के शुक्रवार अथवा शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से ही करना चाहिए| सुबह स्नानादि करके लाल वस्त्र धारण करना चाहिए| लाल रंग मा लक्ष्मी जी को अति प्रिय है| किसी की भी चुगली नहीं करनी चाहिए, बुराई से दूर रहना चाहिए| मन में जय मां लक्ष्मी, जय मां लक्ष्मी का जाप करना चाहिए| क्रोध से भी दूर रहना चाहिए| यह व्रत करने वाले एक बार  भोजन करके व्रत पूरा कर सकते हैं यदि शक्ति नहीं है तो दो बार  भी भोजन कर सकते हैं|
 सबसे अच्छी बात है यह है कि यह व्रत आप समयानुसार कर सकते हैं|
 सबसे पहले व्रत लेने से पहले मन्नत मानी जाती है कि मैं 11, 21 या 51 शुक्रवार  तक यह व्रत करूंगी या करूंगा| यह व्रत कोई भी कर सकता है बच्चे बूढ़े कोई भी| जितनी मन्नत मांगते हैं उसके अंतिम शुक्रवार को उद्यापन किया जाता है|
 शाम को घर का बना प्रसाद बनाकर लक्ष्मी जी का भोग लगाया जाता है|
 किसी के घर का भोजन इस व्रत में नहीं किया जाता है|

 पूजा करने की विधि: सबसे पहले लाल कपड़ा लेकर उसे चौकी पर बिछाए और उसे पूर्व दिशा में रखें, तत्पश्चात लक्ष्मी जी को विराजमान करें साथ में गणेश जी भी होना आवश्यक है|
 सर्वप्रथम गणेश जी का कुमकुम से पूजन करें, तत्पश्चात लक्ष्मी जी को कुमकुम की बिंदी लगाकर पूजन करें|
 एक तांबे के लोटे में जल भर कर उसी चौकी पर दाहिनी तरफ मुट्ठी भर चावल रख कर उस पर लोटा रखें, उस के ऊपर एक कटोरी रखें| कटोरी में एक सोने का गहना रखें, सोने का ना हो तो रुपया या चांदी का गहना रख सकते हैं|
 तत्पश्चात उनको भी कुमकुम की बिंदी लगाए, कलश पर स्वास्तिक का चिन्ह  बनाएं|
 लाल रंग का फूल चढ़ाएं  तत्पश्चात धूपबत्ती व  देसी घी का दीपक जलाएं|
 कुमकुम यहां रोली के लिए कहा गया है, रोली का तिलक लगाने के बाद हल्दी से भी तिलक करें| हाथ में अक्षत { चावल} ले, अक्षत खंडित[ टूटे हुए] नहीं होने चाहिए| इसके बाद कथा पढ़े |






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                               श्री राधे  



जय माता की
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धन प्राप्ति हेतु मंत्र

धन प्राप्ति के लिए अचूक मंत्र

 धन प्राप्ति के लिए एक अन्य मंत्र इस प्रकार है

 ओम श्रीं  ह्रीं  श्रीं  कमले कमलालए प्रसीद प्रसीद श्रीं  ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः||








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                               श्री राधे  



जय माता की
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Mantra for wealth and prosperity धन प्राप्ति के लिए अचूक मंत्र

धन प्राप्ति के लिए अचूक मंत्र

नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है मेरे चैनल मे, आज मैं आपको धन प्राप्ति के लिए एक अचूक मंत्र बताने वाली हूं जिसके प्रतिदिन जाप से आपको अवश्य ही लाभ होगा|

वह मंत्र है:ॐ श्रीं  महालक्ष्मये  नमः|

इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करने से अवश्य ही फल मिलता है, मात्र 10 दिनों के अंदर ही आपको पता चल जाएगा कि आप को लाभ हो रहा है या नहीं|

ध्यान रखने योग्य बातें:

स्वच्छ वस्त्र ही पहन कर जाप करें |

लाल रंग के वस्त्रों का ही प्रयोग करें|

पूर्व दिशा में ही मुख  रखें |
           
 दीपक जलाने में देसी घी का प्रयोग करें |

लाल फूल चढ़ाएं|

कमलगट्टे या स्फटिक  की  माला का प्रयोग करें |

प्रसाद में खीर का भोग लगाएं |

विधि :सबसे पहले लाल कपड़ा लेकर उसे चौकी पर बिछाए और उसे पूर्व दिशा में रखें, तत्पश्चात लक्ष्मी जी को विराजमान करें साथ में गणेश जी भी होना आवश्यक है|
 सर्वप्रथम गणेश जी का कुमकुम से पूजन करें, तत्पश्चात लक्ष्मी जी को कुमकुम की बिंदी लगाकर पूजन करें||

 लाल रंग का फूल चढ़ाएं  तत्पश्चात धूपबत्ती व  देसी घी का दीपक जलाएं|
 कुमकुम यहां रोली के लिए कहा गया है, रोली का तिलक लगाने के बाद हल्दी से भी तिलक करें|  इसके बाद कमल गट्टे की माला से 108 बार माँ लक्ष्मी जी के मंत्र का जाप करें |लाल आस न पर बैठकर जाप करें |जाप का स्वर मध्यम रखें, जाप के बाद माँ की प्रेमपूर्वक आरती करें |


लक्ष्मी जी की आरती 



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क्या बॉस बहुत ज्यादा गुस्सा करते हैं 


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आशा है आपको अवश्य लाभ होगा और मेरी यह पोस्ट आपको जरूर पसंद आई होगी|
  जय माता की 🙏



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                               श्री राधे  

Thursday, June 13, 2019

मोहिनी एकादशी[ वैशाख शुक्ल एकादशी]



इस एकादशी को करने से नंदित कर्मों के पाप से छुटकारा मिल जाता है तथा मुंह बंधन एवं पाप समूल नष्ट होते हैं| यह पृथ्वी कृष्ण पक्ष की एकादशी की तरह किया जाता है|
इस व्रत को भगवान श्री राम ने सीता जी की खोज करते समय किया था उसके बाद युधिष्ठिर ने इस व्रत को किया था |
कथा..
एक राजा का बड़ा पुत्र बहुत दुराचारी था |उसके बुरे कर्मों से दुखी होकर राजा ने उसे घर से निकाल दिया| भवन में रहकर लूटमार करता और जानवरों को मारकर खाता था| एक दिन वह एक ऋषि के आश्रम में पहुंचा| आश्रम के पवित्र वातावरण से उसका ह्रदय पाप कर्मों से विरत हो गया| ऋषि ने उसको पिछले पाप कर्मों से छुटकारा पाने के लिए मोहिनी एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करने को कहा| उसने ऋषि के आदेशानुसार व्रत किया व्रत के प्रभाव से उसकी बुद्धि निर्मल हो गई और उसके सब पाप कर्म नष्ट हो गए|







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                               श्री राधे  



जय माता की
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वरुथिनी एकादशी( वैशाख कृष्ण एकादशी)



यह महिमा माई पुण्य दायिनी सौभाग्य प्रदायिनी एकादशी वैशाख बदी एकादशी को पड़ती है| इस दिन पूर्ण श्रद्धा भक्ति से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, इस एकादशी का व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है| संपूर्ण सुखों की प्राप्ति होती है तथा चरणामृत ग्रहण करने से सुख समृद्धि मिलती है|
कथा: प्राचीन काल में नर्मदा नदी के किनारे मांधाता नाम का राजा राज्य करता था| मैं अत्यंत दयालु दान शील व तपस्वी था| 1 दिन वह तपस्या कर रहा था, उसी समय जंगली भालू ने आकर घसीटनाउसका पैर चबा डाला और फिर उसे घसीटना हुआ बन में ले गया| राजा तू भगवान विष्णु का भक्त था उसने करुणामई आवाज में भगवान विष्णु को पुकारा| दयालु भगवान विष्णु ने प्रकट होकर भालू से राजा के प्राण बचाए, भालू राजा का पैर खा चुका था इससे राजा बहुत ही शोकाकुल हुआ|
भगवन बोले- वत्स !शोक मत करो| यह तुम्हारी पूर्व जन्म के कर्मों के कारण तुम्हें कष्ट भोगने पड़े हैं| अब तुम वरुथिनी एकादशी को मथुरा जाकर मेरे 12 अवतार की मूर्ति की पूजा और व्रत करो| उसके प्रभाव से तुम पुनः शुद्र रंगो वाले हो जाओगे| भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने यह व्रत श्रद्धा पूर्वक किया और प्रभु की कृपा से पुनः सुंदर अंगों वाला हो गया|
बोलो  भगवान विष्णु की जय







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                               श्री राधे  



जय माता की
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Wednesday, June 12, 2019

शिवजी भजन






भक्त एक शिव का चला
शिव को मनाने के लिए
हाथ में दो फूल लोटा
जल चढ़ाने के लिए
भक्त एक शिव का चला....
पहुंच कर मंदिर के अंदर
जल चढ़ाया प्रेम से
भक्त एक शिव का चला शिव....
हाथी जो ऊपर उठाया
हाथ जो ऊपर उठाया
घंटा बजाने के लिए
भक्त एक शिव का चला शिव को मनाने......
देख कर सोने का घंटा
पाप मन में आ गया
देख कर सोने का घंटा
पा प मन में आ गया
चढ़  गया भोले के ऊपर
घंटा चुराने के लिये
भक्त एक शिव का.........
प्रत्यक्ष दर्शन दे उसे और भोले ने कहा
मांग ले जो मांगना है
हाजिर हूँ देने के लिये
भक्त एक....







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                               श्री राधे  



जय माता की
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मैया के भजन




ओढ़ के चुनरी लाल  मैया जी मेरे घर आना
शीश मैया के टीका सो हे
कान मैया के कुंडल सोहे
लगाके बिंदी लाल
मैया जी मेरे घर आना
ओढ़ के चुनरी लाल.......
नाक मैया के नथनी सो हे
गले मैया के हरवा सोहे
पहनने की माला लाल
मैया जी मेरे घर आना
ओढ़ के चुनरी लाल.....
हाथ मैया के कंगन सोहे
कंगन सोहे चूड़ी सो है
लगाके मेहंदी लाल
मैया जी मेरे घर आना
ओ ढ़ के चुनरी लाल.....
पैर  मैया के  पायल सोहे 
पायल सोहे बिछिये सोहे
लगाके महावर लाल
मैया जी मेरे घर आना
ओढ़ के चुनरी लाल........
अंग मैया के साड़ी सोहे
साड़ी सोहे लहंगा सोहे
ओढ़ के चुनरिया लाल
मैया जी मेरे घर आना.....






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                               श्री राधे  









                             

माँ भजन




दे दो, दे दो, दो फूल गुलाब के
मेरी मैया के नौ दिन बहार के...
मुझको माली के जाना पड़ेगा
उसे गजरे को कहना पड़ेगा
दे दो, दे दो तुम्हारा क्या जाएगा
मेरी मैया का मन रह जाएगा...
दे दो दे दो दो फूल गुलाब के........
मुझको पंसारी के जाना पड़ेगा
उसे लोंग को कहना पड़ेगा
दे दो, दे दो तुम्हारा क्या जाएगा
मेरी मैया का मन रह जाएगा...
दे दो दे दो दो फूल गुलाब के........
मुझको  हलवाई के जाना पड़ेगा
उसे हलवा पूरी को कहना पड़ेगा
दे दो, दे दो तुम्हारा क्या जाएगा
मेरी मैया का मन रह जाएगा...
दे दो दे दो दो फूल गुलाब के........
मुझको बजाज के जाना पड़ेगा
उसे लहंगा चुनरी को कहना पड़ेगा
दे दो, दे दो तुम्हारा क्या जाएगा
मेरी मैया का मन रह जाएगा...
दे दो दे दो दो फूल गुलाब के........
....


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                               श्री राधे  

कृष्णा भजन



कन्हैया बांसुरी वाले तुझे राधे बुलाती है
कन्हैया बांसुरी वाले तुझे राधे बुलाती है.....
ओ मोहन मुरली वाले
तुझे ब्रह्मा ने पुकारा
ब्रह्मा ने पुकारा तुझे
शारदा ने पुकारा
रचा जा रास  आ करके
तुझे ब्रह्मा  बुलाते हैं...
कन्हैया बांसुरी वाले............
ओ मोहन मुरली वाले
तुझे विष्णु  ने पुकारा
विष्णु  ने पुकारा तुझे
लक्ष्मी ने पुकारा
रचा जा रास  आ करके
तुझे विष्णु   बुलाते हैं...
कन्हैया बांसुरी वाले............
ओ मोहन मुरली वाले
तुझे शंकर  ने पुकारा
शंकर  ने पुकारा तुझे
गौरा  ने पुकारा
रचा जा रास  आ करके
तुझे शंकर  बुलाते हैं...
कन्हैया बांसुरी वाले............
.....







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                               श्री राधे  



जय माता की
धन्यवाद




                            

कृष्णा भजन

यह भजन मुझे मेरी माँ  ने सिखाया है
यह काफी सरल है और सुनने में बहुत अच्छा है|


कृष्ण तुम फिर से आ जाना
हमारी गोल टोली में....
सुना था एक दिन हमने,
कि  तुम गौ चराते हो...
चराना आज भी होगा...
हमारी गोल टोली में....
कृष्णा तुम..........
कृष्ण तुम फिर से आ जाना
हमारी गोल टोली में....
सुना था एक दिन हमने,
कि  तुम माखन  चुराते हो...
चुराना आज भी होगा...
हमारी गोल टोली में....
कृष्णा तुम..........
कृष्ण तुम फिर से आ जाना
हमारी गोल टोली में....
सुना था एक दिन हमने,
कि  तुम रास रचाते हो...
रचाना रास भी होगा...
हमारी गोल टोली में....
कृष्णा तुम..........
कृष्ण तुम फिर से आ जाना
हमारी गोल टोली में....
सुना था एक दिन हमने,
कि  तुम बंसी बजाते हो...
बजाना आज भी होगा...
हमारी गोल टोली में....
कृष्णा तुम..........


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                               श्री राधे  


शिव भजन



यह भजन मेरी दादी मां ने मुझे सिखाया था, मुझे आज भी याद है कितनी मेहनत करके उन्होंने मुझे एक एक लाइन सिखाई थी जब मैं केवल 5 साल की थी, आशा है आप लोगों को भी यह भजन पसंद आएगा.....



तन मन धन सब तुम पे बलिहार है
आजा मेरे भोले बाबा तेरा इंतजार है.....
तन मन धन सब तुम पे बलिहार है
आजा मेरे भोले बाबा तेरा इंतजार है...
भोले के मंदिर में धूनी रम आऊंगी
बाजी के बदले में मन को लगाऊंगी
कभी कभी जीत है तो  कभी कभी हार है...
आजा मेरे भोले बाबा तेरा इंतजार है.....
तन मन धन सब तुम पे बलिहार है...
आजा मेरे भोले बाबा तेरा इंतजार है..
भोले के मंदिर में चौपड़ बिछा आऊंगी
रो रो के अपनी कहानी सुना आऊंगी
तुम ही मेरे भोले बाबा करो बेड़ा पार है
तुम ही मेरे भोले बाबा करो बेड़ा पार है
आजा मेरे भोले बाबा तेरा इंतजार है
तन मन धन सब तुम पे बलिहार है
आजा मेरे...........
भोले के मंदिर में अंधियारी छा गई
पूजा करने वालों को मस्ती सी छा गई
यह भी तो पता ना चला दिन है कि रात है
आजा मेरे भोले बाबा तेरा इंतजार है
तन मन धन सब तुम....................
....



 लेख :




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                               श्री राधे  



जय माता की
धन्यवाद






                             

माँ के भजन



पीली पीली सरसों
मां की पीली है चुनरिया
पीली पीली सरसों माँ  की पीली है चुनरिया
रूप का नजारा
माँ के  रुप का नजारा
जरा देखन दे देखन दे
अब के बरस मां को टीका बनबाऊंगी
अब के बरस मां को नथनी बनबाऊंगी
बिंदी का नजारा मां की बिंदी का नजारा
देखन दे...... देखन दे
पीली पीली सरसों................
अब के बरस माँ  को कुंडल बनबाउंगी
अब के बरस मा को हरवा बनबाउंगी
सैंडल का नजराना की लाली का नजारा
देखने दे देखने दे
पीली पीली सरसों...............
अब के बरस  मां को कंगन बनबाऊंगी
अब के बरस  मां को चूड़ी  बनबाऊंगी..
मेहंदी का नजारा मां की मेहंदी का नजारा
देखन दे देखन दे....
...
पीली पीली सरसों मां की पीली है चुनरिया......
अब के बरस  मां को पायल बनबाऊंगी
अब के बरस  मां को बिछिया बनबाऊंगी..
महावर का नजारा मां की  महावर का नजारा
देखन दे देखन दे
पीली पीली सरसों.......
अब के बरस  मां को लहंगा बनबाऊंगी
अब के बरस  मां को साड़ी बनबाऊंगी..
चुनरी का नजारा मां की चुनरी का नजारा
देखन दे देखन दे
पीली पीली सरसों मा की पीली है चुनरिया
रुप का नजारा मां के रुप का नजारा
देखन दे देखन दे............







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                               श्री राधे  



जय माता की
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Saturday, June 8, 2019

आषाढ़ कृष्ण एकादशी



इस एकादशी को भगवान नारायण की  पूजा आराधना की जाती है|

कथा:
प्राचीन काल में अलकापुरी में राजा कुबेर के यहां हेम नामक एक माली रहता था| उसका कार्य नित्य प्रति भगवान शंकर के पूजन आरती के लिए मानसरोवर से फूल लाना था एक दिन उसे अपनी पत्नी के साथ स्वच्छंद बिहार करने के कारण फूल लाने में बहुत देर हो गई मैं दरबार में विलंब से पहुंचा इससे क्रोधित होकर कुबेर ने उसे कोढ़ी होने का श्राप दे दिया सबसे कुड़ी होकर हेमाली इधर-उधर भटकता हुआ 1 दिन देव योग से मार्कंडेय ऋषि के आश्रम में जहां पहुंचा| ऋषि ने अपने योग बल से उसके दुखी होने का कारण जान लिया| तब उसे उन्होंने योगिनी एकादशी का व्रत करने को कहा| व्रत के प्रभाव से हेम माली का कोड समाप्त हो गया और वह दिव्य शरीर धारण कर स्वर्ग लोक को प्रस्थान कर गया|
 





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                               श्री राधे  



जय माता की
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Nirjala Ekadashi







निर्जला एकादशी का व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं| तथा वर्ष भर की एकादशियों   के व्रत का फल प्राप्त होता है|

पूजन विधि :
एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर विष्णुजी और लक्ष्मी जी को रखिये, रोली व चन्दन का तिलक लगाएं|
फूल चढ़ाएं, देशी घी का दीपक  व  धूपबत्ती जलायें |
हाथ में पुष्प लेकर कथा पढ़ें |
कथा पढ़ने के पश्चात् पुष्प ईश्वर के चरणों में चढ़ायें तथा  ब्राह्मणों को यथासंभव दान दें |


कथा:
एक समय भीमसेन ने व्यास जी से कहा कि हे पितामह! युधिष्ठिर अर्जुन नकुल सहदेव कुंती और द्रौपदी सभी एकादशी के दिन भोजन नहीं करते हैं और मुझसे भी यही कहा करते हैं कि हे भीमसेन एकादशी के दिन भोजन ना किया करो मैं उनसे यही कहता हूं कि मैं भूख सहन नहीं कर सकता मैं विधि पूर्वक दान दे दूंगा और भगवान वासुदेव की पूजा करके उन्हें प्रसन्न कर लूंगा किंतु व्रत किए बिना मुझे एकादशी के व्रत का फल किस प्रकार प्राप्त हो ऐसा कोई उपाय बताइए व्यास जी बोले हे ब्रदर यदि तुम्हें स्वर्ग प्रिय है और तुम नरक में नहीं जाना चाहते तो दोनों पक्षों की एकादशी ओं में तुम्हें भोजन नहीं करना चाहिए भीमसेन ने कहा पिता में एक समय के भोजन से भी तो मेरा निर्वाह नहीं होता मेरे पेट में बकरे नाम की अग्नि सदैव जलती रहती है बहुत मात्रा में भोजन करने पर ही मुझे भूख शांत होती है |हेमराज मुझे कोई ऐसा बताइए जिसके करने से मेरा कल्याण हो मैं उस गत को अवश्य ही करूंगा|
व्यास जी ने कहा जेष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला व्रत किया जाता करो स्नान आज मन में जल ग्रहण करने का कोई दोष नहीं है एक माशा सोने की मणि जितने जल में डूब जाए ऐसा आसमान शरीर को शुद्ध करने वाला कहा गया है अन्य बिल्कुल ना खाएं अन्य खाने से व्रत खंडित हो जाता है तुम सदैव इसी काशी का व्रत रखा करो इससे तुम्हारा सब राशियों को अन्न खाने का पाप दूर हो जाएगा और साथ ही पूरे वर्ष की एकादशी के व्रत का पुण्य प्राप्त होगा|







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                               श्री राधे  



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Wednesday, June 5, 2019

जेष्ठ मास के व्रत एवं त्यौहार, गंगा दशहरा

ओम गं गणपतए नमः
 गंगा दशहरा का पर्व जेष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है जेष्ठ शुक्ल दशमी को सोमवार को हस्त नक्षत्र में गंगावतरण हुआ था| इसलिए यह तिथि अधिक महत्वपूर्ण है, स्थिति में स्नान दान तर्पण से 10 पापों का नाश होता है| इसलिए इसे दशहरा कहते हैं|
 कथा:
 प्राचीन काल में अयोध्या में समर नाम के राजा राज्य करते थे उनके के शनि तथा समिति नामक दो रानियां थी, केशनी से अंशुमान नामक पुत्र हुआ तथा समिति के 60000 पुत्र थे| एक बार राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया यज्ञ की पूर्ति के लिए घोड़ा छोड़ा इंद्रिय को भंग करने हेतु घोड़े को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध आए|
 राजा ने यज्ञ के घोड़े को खोजने के लिए अपने साठ हजार पुत्रों को भेजा| घोड़े को खोजते खोजते बे कपिल मुनि के आश्रम में पहुंचे तो उन्होंने यज्ञ के घोड़े का वहां बंधा पाया, उस समय चोर चोर कहकर पुकारना शुरू कर दिया| कपिल मुनि की समाधि टूट गई तथा राजा के सारे पुत्र कपिल मुनि की क्रोध अग्नि में जलकर भस्म हो गए|
         अंशुमान पिता की आज्ञा पाकर अपने भाइयों को खोजता हुआ जब मुनि के आश्रम पहुंचा तो महात्मा गुरु ने उसके भाइयों के भस्म होने का सारा वृत्तांत कह सुनाया| गरुड़ जी ने अंशुमान को यह भी बताया कि यदि उनकी मुक्ति चाहते हो तो गंगा जी को स्वर्ग से धरती पर लाना होगा इस समय अशोक को ले जाकर अपने पिता के यज्ञ को पूर्ण कराओ इसके बाद गंगा को पृथ्वी पर लाने का कार्य करना अंशुमान ने घोड़े सहित यज्ञ मंडप में पहुंचकर राजा सागर से वृत्तांत कह सुनाया|
          महाराज सगर की मृत्यु के पश्चात अंशुमान ने गंगा जी को पृथ्वी पर लाने के लिए तप किया परंतु वे असफल रहे इसके बाद उनके पुत्र दिलीप ने भी तपस्या की परत दुपहरी असफल रहे अंत में दिलीप के पुत्र भागीरथ ने गंगा जी को पृथ्वी पर लाने के लिए गोकर्ण तीर्थ में जाकर कठोर तपस्या की तपस्या करते करते कई वर्ष बीत गए, तब ब्रह्माजी प्रसन्न हुए तथा गंगा जी को पृथ्वी लोक पर ले जाने का वरदान दिया अब समस्या यह थी कि ब्रह्मा जी के कमंडल से छूटने के बाद गंगा जी के देखो पृथ्वी पर कौन संभालेगा ब्रह्मा जी ने बताया कि भूलोक में भगवान शंकर के अतिरिक्त किसी में भी यह शक्ति नहीं है जो गंगा जी के बेटे संभाल सकें इसलिए उचित यह है कि गंगा का बैग संभालने के लिए भगवान शिव से अनुग्रह किया जाए|
 महाराज भगीरथ एक अंगूठे पर खड़े होकर भगवान शंकर की आराधना करने लगे उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर शंकर जी ने गंगा जी को अपनी जटाओं में संभालने के लिए तैयार कर लिया पंगा जी जब देव लोक से पृथ्वी की ओर बढ़ी तो शिव जी ने गंगा जी की धारा को अपनी जटाओं में समेट लिया कई वर्षों तक गंगा जी को जटाओं से बाहर निकालने का पथ ना मिल सका भागीरथ के बिना करने पर शिव जी ने गंगा जी को अपनी जटाओं से मुक्त करने के लिए तैयार तैयार किया, इस प्रकार शिवजी की जटाओं से छूटकर गंगा जी माली की घाटियों में कल कल करती है मैदान की ओर बढ़ी जिस रास्ते से गंगाजी जा रही थी उसी मार्ग में ऋषि जंहु का आश्रम था,
 तपस्या में विघ्न समझकर गंगा जी को पी गए भगीरथ की प्रार्थना करने पर उन्हें उन्हें पुनः जान से निकाल दिया तभी से गंगा जन्मपत्री या जान भी कहलाये इस प्रकार अनेक स्थलों को पार करती हुई जान भी नहीं कपिल मुनि के आश्रम में पहुंचकर सगर के साठ हजार पुत्रों के बस में अवशेषों को तार कर मुक्त किया उसी समय ब्रह्मा जी ने प्रकट होकर भगीरथ की कथा सागर के साठ हजार पुत्रों के अमर होने का वर दिया तथा घोषित किया कि तुम्हारे नाम पर गंगा जी का नाम भागीरथी होगा अब तुम जाकर अयोध्या का राजा जी अंतर्ध्यान हो गए|
 बोलो गंगा मैया की जय!






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                               श्री राधे  



जय माता की
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