इस एकादशी को करने से नंदित कर्मों के पाप से छुटकारा मिल जाता है तथा मुंह बंधन एवं पाप समूल नष्ट होते हैं| यह पृथ्वी कृष्ण पक्ष की एकादशी की तरह किया जाता है|
इस व्रत को भगवान श्री राम ने सीता जी की खोज करते समय किया था उसके बाद युधिष्ठिर ने इस व्रत को किया था |
कथा..
एक राजा का बड़ा पुत्र बहुत दुराचारी था |उसके बुरे कर्मों से दुखी होकर राजा ने उसे घर से निकाल दिया| भवन में रहकर लूटमार करता और जानवरों को मारकर खाता था| एक दिन वह एक ऋषि के आश्रम में पहुंचा| आश्रम के पवित्र वातावरण से उसका ह्रदय पाप कर्मों से विरत हो गया| ऋषि ने उसको पिछले पाप कर्मों से छुटकारा पाने के लिए मोहिनी एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करने को कहा| उसने ऋषि के आदेशानुसार व्रत किया व्रत के प्रभाव से उसकी बुद्धि निर्मल हो गई और उसके सब पाप कर्म नष्ट हो गए|
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जय माता की
धन्यवाद
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