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Saturday, June 8, 2019

Nirjala Ekadashi







निर्जला एकादशी का व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं| तथा वर्ष भर की एकादशियों   के व्रत का फल प्राप्त होता है|

पूजन विधि :
एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर विष्णुजी और लक्ष्मी जी को रखिये, रोली व चन्दन का तिलक लगाएं|
फूल चढ़ाएं, देशी घी का दीपक  व  धूपबत्ती जलायें |
हाथ में पुष्प लेकर कथा पढ़ें |
कथा पढ़ने के पश्चात् पुष्प ईश्वर के चरणों में चढ़ायें तथा  ब्राह्मणों को यथासंभव दान दें |


कथा:
एक समय भीमसेन ने व्यास जी से कहा कि हे पितामह! युधिष्ठिर अर्जुन नकुल सहदेव कुंती और द्रौपदी सभी एकादशी के दिन भोजन नहीं करते हैं और मुझसे भी यही कहा करते हैं कि हे भीमसेन एकादशी के दिन भोजन ना किया करो मैं उनसे यही कहता हूं कि मैं भूख सहन नहीं कर सकता मैं विधि पूर्वक दान दे दूंगा और भगवान वासुदेव की पूजा करके उन्हें प्रसन्न कर लूंगा किंतु व्रत किए बिना मुझे एकादशी के व्रत का फल किस प्रकार प्राप्त हो ऐसा कोई उपाय बताइए व्यास जी बोले हे ब्रदर यदि तुम्हें स्वर्ग प्रिय है और तुम नरक में नहीं जाना चाहते तो दोनों पक्षों की एकादशी ओं में तुम्हें भोजन नहीं करना चाहिए भीमसेन ने कहा पिता में एक समय के भोजन से भी तो मेरा निर्वाह नहीं होता मेरे पेट में बकरे नाम की अग्नि सदैव जलती रहती है बहुत मात्रा में भोजन करने पर ही मुझे भूख शांत होती है |हेमराज मुझे कोई ऐसा बताइए जिसके करने से मेरा कल्याण हो मैं उस गत को अवश्य ही करूंगा|
व्यास जी ने कहा जेष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला व्रत किया जाता करो स्नान आज मन में जल ग्रहण करने का कोई दोष नहीं है एक माशा सोने की मणि जितने जल में डूब जाए ऐसा आसमान शरीर को शुद्ध करने वाला कहा गया है अन्य बिल्कुल ना खाएं अन्य खाने से व्रत खंडित हो जाता है तुम सदैव इसी काशी का व्रत रखा करो इससे तुम्हारा सब राशियों को अन्न खाने का पाप दूर हो जाएगा और साथ ही पूरे वर्ष की एकादशी के व्रत का पुण्य प्राप्त होगा|







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धन्यवाद




                               श्री राधे  



जय माता की
धन्यवाद







                             










                           

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