यह महिमा माई पुण्य दायिनी सौभाग्य प्रदायिनी एकादशी वैशाख बदी एकादशी को पड़ती है| इस दिन पूर्ण श्रद्धा भक्ति से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, इस एकादशी का व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है| संपूर्ण सुखों की प्राप्ति होती है तथा चरणामृत ग्रहण करने से सुख समृद्धि मिलती है|
कथा: प्राचीन काल में नर्मदा नदी के किनारे मांधाता नाम का राजा राज्य करता था| मैं अत्यंत दयालु दान शील व तपस्वी था| 1 दिन वह तपस्या कर रहा था, उसी समय जंगली भालू ने आकर घसीटनाउसका पैर चबा डाला और फिर उसे घसीटना हुआ बन में ले गया| राजा तू भगवान विष्णु का भक्त था उसने करुणामई आवाज में भगवान विष्णु को पुकारा| दयालु भगवान विष्णु ने प्रकट होकर भालू से राजा के प्राण बचाए, भालू राजा का पैर खा चुका था इससे राजा बहुत ही शोकाकुल हुआ|
भगवन बोले- वत्स !शोक मत करो| यह तुम्हारी पूर्व जन्म के कर्मों के कारण तुम्हें कष्ट भोगने पड़े हैं| अब तुम वरुथिनी एकादशी को मथुरा जाकर मेरे 12 अवतार की मूर्ति की पूजा और व्रत करो| उसके प्रभाव से तुम पुनः शुद्र रंगो वाले हो जाओगे| भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने यह व्रत श्रद्धा पूर्वक किया और प्रभु की कृपा से पुनः सुंदर अंगों वाला हो गया|
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बोलो भगवान विष्णु की जय
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जय माता की
धन्यवाद
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